दीवानी, उपभोक्ता एवं वसूली
चेक बाउंस (धारा 138, NI अधिनियम)
ऋण के लिए दिया गया चेक अनादरित होने पर माँग नोटिस, परिवाद और विचारण।
DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ
कानून क्या कहता है
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत, यदि कानूनी रूप से प्रवर्तनीय ऋण चुकाने के लिए दिया गया चेक अपर्याप्त धन या तय सीमा से अधिक होने के कारण बिना भुगतान लौट आए, और नोटिस के बाद भी चेक जारीकर्ता भुगतान न करे, तो यह अपराध है। आदाता या सम्यक् अनुक्रम धारक को बैंक का वापसी ज्ञापन मिलने के 30 दिन के भीतर चेक जारीकर्ता को लिखित माँग नोटिस भेजना होता है; फिर जारीकर्ता के पास नोटिस मिलने से 15 दिन भुगतान के लिए होते हैं। भुगतान न होने पर उन 15 दिनों की समाप्ति के एक महीने के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद दायर किया जाता है। यह अपराध दो वर्ष तक के कारावास, या चेक राशि के दोगुने तक के जुर्माने, या दोनों से दंडनीय है। यह अपराध शमनीय है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कानूनी नोटिस कौन भेजता है?
चेक का आदाता या सम्यक् अनुक्रम धारक, आमतौर पर अधिवक्ता के माध्यम से, चेक जारीकर्ता को लिखित माँग नोटिस भेजता है। बैंक केवल कारण बताने वाले ज्ञापन के साथ चेक लौटाता है।
समय-सीमाएँ क्या हैं?
चेक उसकी वैधता अवधि में प्रस्तुत करें; वापसी ज्ञापन के 30 दिन के भीतर नोटिस भेजें; जारीकर्ता के पास नोटिस मिलने से भुगतान के लिए 15 दिन होते हैं; और उन 15 दिनों के समाप्त होने के एक महीने के भीतर परिवाद दायर करना होता है। पर्याप्त कारण होने पर अदालत परिवाद दायर करने में विलंब माफ़ कर सकती है।
दंड क्या है?
दो वर्ष तक का कारावास, या चेक राशि के दोगुने तक का जुर्माना, या दोनों। मामले के दौरान अदालत धारा 143A के अंतर्गत अंतरिम प्रतिकर का आदेश भी दे सकती है।
मुझे नोटिस मिला है। क्या करूँ?
नोटिस मिलने की तिथि नोट करें, क्योंकि 15 दिन उसी से गिने जाते हैं। शीघ्र सलाह लें: तथ्यों के अनुसार आप भुगतान कर सकते हैं, ऋण पर विवाद करते हुए उत्तर दे सकते हैं, या बचाव तैयार कर सकते हैं। मामले में समझौता और शमन भी हो सकता है।
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