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तलाक

आपसी सहमति से या वैधानिक आधारों पर तलाक, और भरण-पोषण, अभिरक्षा व सामान के निपटारे।

DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ

कानून क्या कहता है

तलाक का कानून पक्षों की व्यक्तिगत विधि पर निर्भर करता है: हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955; उसके अंतर्गत हुए विवाहों के लिए विशेष विवाह अधिनियम, 1954; और मुस्लिम, ईसाई व पारसी के लिए अलग कानून। हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत क्रूरता, परित्याग या जारता जैसे आधारों पर (धारा 13), या आपसी सहमति से (धारा 13B) तलाक माँगा जा सकता है, जहाँ उपयुक्त मामलों में अदालत प्रतीक्षा अवधि माफ़ कर सकती है। भारतीय कानून में संपत्ति को बराबर बाँटने का कोई सामान्य नियम नहीं है; हर पति-पत्नी अपनी संपत्ति रखते हैं, स्त्रीधन पत्नी का होता है, और अदालत स्थायी निर्वाह-व्यय दे सकती है। लखनऊ में ये मामले कुटुंब न्यायालय सुनता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आपसी सहमति से तलाक कैसे होता है?

दोनों पति-पत्नी संयुक्त याचिका दायर करते हैं कि वे अलग रह रहे हैं और तलाक पर सहमत हैं। पहले प्रस्ताव के बाद वैधानिक अवधि के बाद दूसरा प्रस्ताव होता है, जिसे अदालत उपयुक्त मामलों में माफ़ कर सकती है। निर्वाह-व्यय, अभिरक्षा और सामान की शर्तें आमतौर पर दर्ज की जाती हैं।

क्या संपत्ति बराबर बँटती है?

नहीं। भारत में सामुदायिक संपत्ति का कोई सामान्य नियम नहीं है। हर पति-पत्नी अपने नाम की संपत्ति रखते हैं, स्त्रीधन पत्नी का होता है, और विवाह के समय संयुक्त रूप से दी गई संपत्ति पर हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 27 के अंतर्गत निर्णय हो सकता है। आर्थिक सहायता भरण-पोषण और निर्वाह-व्यय से तय होती है।

बच्चे की अभिरक्षा कैसे तय होती है?

बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है। अदालत बच्चे की आयु, आवश्यकताएँ, पढ़ाई और, पर्याप्त आयु होने पर, उसकी इच्छा देखती है, और एक माता-पिता को अभिरक्षा तथा दूसरे को मिलने का अधिकार, या साझा व्यवस्था दे सकती है।

विवादित तलाक में क्या होता है?

एक पक्ष वैधानिक आधार पर याचिका दायर करता है और दूसरा उत्तर देता है। कुटुंब न्यायालय पहले पक्षों को परामर्श या मध्यस्थता के लिए भेजता है, और विफल होने पर मामला साक्ष्य और बहस के चरण में जाता है।

इस सेवा को संभालने वाले वकील

Arvind Patel

सहयोगी अधिवक्ता

लखनऊ बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

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