आपराधिक एवं साइबर कानून
साइबर अपराध एवं डिजिटल धोखाधड़ी
ऑनलाइन धोखाधड़ी, हैकिंग और उत्पीड़न की शिकायत, साक्ष्य सुरक्षित रखना और शिकायत को आगे बढ़ाना।
DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ
कानून क्या कहता है
साइबर अपराधों पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और BNS के अंतर्गत कार्रवाई होती है, जैसे छल, पहचान की चोरी, अनधिकृत पहुँच और ऑनलाइन उत्पीड़न। वित्तीय धोखाधड़ी की सूचना तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर, और अपने बैंक को दें, ताकि धन का पता लगाए जा सकने के दौरान लेन-देन चिह्नित हो सके। FIR पुलिस थाने या साइबर थाने में दर्ज कराई जा सकती है। स्क्रीनशॉट, URL, लेन-देन संदर्भ और फ़ोन नंबर सुरक्षित रखें। धन वापस मिलेगा या नहीं, यह तथ्यों और सूचना कितनी जल्दी दी गई, इस पर निर्भर करता है।
परामर्श
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अपना नाम, नंबर और मामले के बारे में एक पंक्ति छोड़ें। चैम्बर का कोई सदस्य कार्य समय में आपको कॉल या संदेश करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मेरे साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है। पहले क्या करूँ?
तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें, और कार्ड या खाता बंद कराने के लिए अपने बैंक को सूचित करें। फिर साक्ष्य के साथ लिखित शिकायत या FIR दर्ज कराएँ।
कौन से साक्ष्य सुरक्षित रखूँ?
संदेशों और प्रोफ़ाइल के स्क्रीनशॉट, लिंक, ईमेल हेडर, बैंक और UPI लेन-देन संदर्भ, कॉल रिकॉर्ड और कोई रसीद। संबंधित चैट या ऐप मिटाएँ नहीं।
क्या ऑनलाइन उत्पीड़न अपराध है?
हाँ। तथ्यों के अनुसार यह BNS (जैसे पीछा करना, आपराधिक अभित्रास या मानहानि) या IT अधिनियम (जैसे अश्लील सामग्री प्रकाशित करना) के अंतर्गत आ सकता है। हटवाने के लिए सामग्री की सूचना प्लेटफ़ॉर्म को भी दी जा सकती है।
मेरा खाता हैक हो गया। अब क्या?
खाता सुरक्षित करें (पासवर्ड बदलें, दो-चरणीय सत्यापन चालू करें), अपने संपर्कों को बताएँ, प्लेटफ़ॉर्म और cybercrime.gov.in पर सूचना दें, और जो बदला या भेजा गया उसका रिकॉर्ड रखें।
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