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आपराधिक एवं साइबर कानून

आपराधिक प्रक्रिया

BNSS के अंतर्गत FIR से अपील तक आपराधिक प्रक्रिया का सारांश, और हर चरण पर अधिकार।

DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ

कानून क्या कहता है

1 जुलाई 2024 से आपराधिक प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS), अपराध भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) और साक्ष्य भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) से नियंत्रित होते हैं। इन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता, भारतीय दंड संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया है। उस तिथि से पहले दर्ज मामले सामान्यतः पुराने कानूनों के अंतर्गत चलते रहते हैं। मुख्य चरण हैं: FIR या परिवाद, जाँच, पुलिस रिपोर्ट, संज्ञान, आरोप, विचारण, निर्णय और अपील। अनुच्छेद 20, 21 और 22 सहित संवैधानिक अधिकार हर चरण पर लागू होते हैं।

परामर्श

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरे मामले पर पुराना कानून लागू होगा या नया?

मोटे तौर पर, 1 जुलाई 2024 से पहले लंबित या दर्ज मामले दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत चलते हैं, और बाद के मामले BNSS और BNS के अंतर्गत आते हैं। कुछ संक्रमणकालीन प्रश्न तथ्यों पर निर्भर करते हैं, इसलिए अपने अधिवक्ता से पूछें।

गिरफ्तारी के समय मुझे क्या बताया जाना चाहिए?

गिरफ्तारी के आधार, जमानती अपराध होने पर जमानत का अधिकार, और यह कि किसी संबंधी या मित्र को सूचित किया जा सकता है। गिरफ्तारी ज्ञापन बनाया जाता है और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है।

यदि पुलिस मेरी FIR दर्ज करने से इनकार करे तो?

आप शिकायत का सार लिखित रूप में पुलिस अधीक्षक को भेज सकते हैं, और मजिस्ट्रेट के पास भी आवेदन कर सकते हैं, जो पंजीकरण का निर्देश दे सकते हैं या परिवाद पर संज्ञान ले सकते हैं।

आरोप पत्र क्या है?

जाँच के अंत में अदालत में दाखिल पुलिस रिपोर्ट, जिसमें एकत्र साक्ष्य का विवरण होता है। फिर अदालत तय करती है कि संज्ञान लेकर आगे बढ़ा जाए या नहीं।

इस सेवा को संभालने वाले वकील

Avinash Pratap Singh

मैनेजिंग पार्टनर

अवध बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

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Ambrish Kashyap

सहयोगी अधिवक्ता

लखनऊ बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

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