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सर्वोच्च न्यायालय के मामले
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विशेष अनुमति याचिकाएँ, अपीलें और रिट याचिकाएँ।
DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ
कानून क्या कहता है
अधिकांश मामले उच्च न्यायालय या अधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अनुच्छेद 136 के अंतर्गत विशेष अनुमति याचिका से सर्वोच्च न्यायालय पहुँचते हैं; न्यायालय पहले तय करता है कि अनुमति दी जाए या नहीं। कुछ कानून अपील का सीधा अधिकार देते हैं। मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए अनुच्छेद 32 के अंतर्गत रिट याचिका दायर की जा सकती है। सर्वोच्च न्यायालय नियम, 2013 के अंतर्गत मामला एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के माध्यम से दायर होता है। विशेष अनुमति याचिकाओं और अपीलों पर परिसीमा अवधि लागू होती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विशेष अनुमति याचिका क्या है?
अनुच्छेद 136 के अंतर्गत याचिका जिसमें किसी निर्णय या आदेश के विरुद्ध अपील की अनुमति माँगी जाती है। अनुमति विवेकाधीन है और सामान्यतः विधि का सारवान प्रश्न या गंभीर अन्याय दिखाए जाने पर दी जाती है।
सर्वोच्च न्यायालय में कौन दायर कर सकता है?
दाखिला सर्वोच्च न्यायालय में पंजीकृत एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के माध्यम से होता है; अन्य अधिवक्ता एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के निर्देश पर उपस्थित होकर बहस कर सकते हैं।
क्या मैं सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकता हूँ?
मौलिक अधिकारों के लिए अनुच्छेद 32 सीधे रिट याचिका की अनुमति देता है, पर न्यायालय प्रायः अपेक्षा करता है कि पहले अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय जाया जाए।
संबंधित सेवाएँ
उच्च न्यायालय में आपराधिक मामले
इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ के समक्ष आपराधिक अपील, पुनरीक्षण, जमानत और रद्दकरण याचिकाएँ।
आपराधिक अपील
कानून द्वारा दी गई समय-सीमा के भीतर अपीलीय अदालत में दोषसिद्धि, सज़ा या दोषमुक्ति को चुनौती।
रिट याचिकाएँ
राज्य या लोक प्राधिकारियों की अवैध कार्रवाई के विरुद्ध अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय में याचिकाएँ।