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आपराधिक एवं साइबर कानून

उच्च न्यायालय में आपराधिक मामले

इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ के समक्ष आपराधिक अपील, पुनरीक्षण, जमानत और रद्दकरण याचिकाएँ।

DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ

कानून क्या कहता है

अधिकांश आपराधिक विचारण जिला न्यायालयों में होते हैं। उच्च न्यायालय का आपराधिक कार्य मुख्यतः अपीलीय और पर्यवेक्षी होता है: दोषसिद्धि या दोषमुक्ति के विरुद्ध अपील, निचली अदालतों के आदेशों के विरुद्ध पुनरीक्षण याचिका, जमानत और अग्रिम जमानत के आवेदन, BNSS की धारा 528 (पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482) के अंतर्गत FIR या कार्यवाही रद्द कराने की याचिकाएँ, और अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट याचिकाएँ। लखनऊ खंडपीठ अपने क्षेत्राधिकार वाले जिलों से उठने वाले मामले सुनती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या आपराधिक मामला सीधे उच्च न्यायालय में शुरू हो सकता है?

विचारण सामान्यतः जिला न्यायालयों में होते हैं। उच्च न्यायालय में अपील, पुनरीक्षण, जमानत, रद्दकरण और रिट के लिए जाया जाता है, और कुछ परिस्थितियों में यह मामले स्थानांतरित भी कर सकता है।

आपराधिक पुनरीक्षण क्या है?

पुनरीक्षण में उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय से निचली अदालत के आदेश की शुद्धता, वैधता या औचित्य की जाँच करने का अनुरोध किया जाता है, जहाँ उस आदेश के विरुद्ध अपील नहीं होती।

क्या उच्च न्यायालय पुनर्विचारण का आदेश दे सकता है?

अपील में उच्च न्यायालय निर्णय की पुष्टि कर सकता है, उसे बदल सकता है या उलट सकता है, और जहाँ कानून अनुमति देता है, पुनर्विचारण का आदेश दे सकता है।

उच्च न्यायालय के मामलों में कितना समय लगता है?

यह मामले के प्रकार, तथ्यों और अदालत की सूची पर निर्भर करता है। जमानत आवेदन सामान्यतः अपीलों से पहले सूचीबद्ध होते हैं।

इस सेवा को संभालने वाले वकील

Avinash Pratap Singh

मैनेजिंग पार्टनर

अवध बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

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Ambrish Kashyap

सहयोगी अधिवक्ता

लखनऊ बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

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