डेमोक्रेट लीगल एंड पार्टनर्स
सभी सेवाएँ

आपराधिक एवं साइबर कानून

आपराधिक अपील

कानून द्वारा दी गई समय-सीमा के भीतर अपीलीय अदालत में दोषसिद्धि, सज़ा या दोषमुक्ति को चुनौती।

DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ

कानून क्या कहता है

मजिस्ट्रेट द्वारा दोषसिद्ध व्यक्ति सामान्यतः सत्र न्यायालय में, और सत्र न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध व्यक्ति उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है। अपीलीय अदालत विचारण का अभिलेख पढ़ती है, बहस सुनती है और दोषसिद्धि या सज़ा की पुष्टि कर सकती है, उसे बदल सकती है या रद्द कर सकती है, या पुनर्विचारण का आदेश दे सकती है। समय-सीमा परिसीमा अधिनियम, 1963 तय करता है और यह अदालत तथा अपील के प्रकार के अनुसार अलग होती है; पर्याप्त कारण होने पर विलंब माफ़ किया जा सकता है। अपील लंबित रहने तक अपीलीय अदालत सज़ा निलंबित कर जमानत दे सकती है।

परामर्श

चैम्बर से बात करें।

अपना नाम, नंबर और मामले के बारे में एक पंक्ति छोड़ें। चैम्बर का कोई सदस्य कार्य समय में आपको कॉल या संदेश करेगा।

गोपनीय रखी जाती है। केवल आपसे संपर्क के लिए उपयोग होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अपील में कौन से आधार उठाए जा सकते हैं?

कानून की त्रुटि, साक्ष्य का गलत मूल्यांकन, ऐसी प्रक्रियात्मक अनियमितता जिससे नुकसान हुआ हो, और परिस्थितियों में अत्यधिक सज़ा।

अपील के लिए कितना समय मिलता है?

अवधि परिसीमा अधिनियम, 1963 तय करता है, जो अदालत और अपील के प्रकार पर निर्भर करती है। निर्णय की प्रमाणित प्रति जल्दी लें; उसे प्राप्त करने में लगा समय गिना नहीं जाता। अवधि बीत जाने पर विलंब माफ़ी का आवेदन दिया जा सकता है।

क्या अपील लंबित रहते जमानत मिल सकती है?

हाँ, अपीलीय अदालत सज़ा निलंबित कर अपीलकर्ता को जमानत पर छोड़ सकती है। वह सज़ा, हिरासत में बिताया गया समय और अपील के आधार देखती है।

क्या अपील में नए गवाह सुने जाते हैं?

सामान्यतः नहीं; अपील विचारण के अभिलेख पर तय होती है। आवश्यक समझने पर अपवादस्वरूप मामलों में अपीलीय अदालत अतिरिक्त साक्ष्य ले सकती है।

इस सेवा को संभालने वाले वकील

Avinash Pratap Singh

मैनेजिंग पार्टनर

अवध बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

प्रोफ़ाइल देखें

Piyush Singh

मैनेजिंग पार्टनर

अवध बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

प्रोफ़ाइल देखें