रोज़गार, सार्वजनिक एवं विशेष
बीमा दावे
अस्वीकृत या विलंबित बीमा दावों के विवाद लोकपाल, उपभोक्ता आयोगों या अदालतों के समक्ष।
DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ
कानून क्या कहता है
बीमा बीमा अधिनियम, 1938 और भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) से विनियमित है। जीवन, स्वास्थ्य, मोटर या संपत्ति पॉलिसी के अंतर्गत दावा अस्वीकृत या विलंबित होने पर पॉलिसीधारक को पहले बीमाकर्ता की शिकायत प्रक्रिया का उपयोग करना चाहिए। फिर शिकायत बीमा लोकपाल नियम, 2017 के अंतर्गत, उन नियमों की सीमाओं के भीतर, बीमा लोकपाल के पास, या उपभोक्ता आयोग में जा सकती है। विवाद प्रायः पॉलिसी की शब्दावली, प्रस्ताव के समय दी गई जानकारी और अपवर्जनों पर निर्भर करते हैं।
परामर्श
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मेरा दावा अस्वीकृत हुआ। पहले क्या करूँ?
कारणों सहित अस्वीकृति लिखित में माँगें, फिर पॉलिसी, दावा प्रपत्र और पत्राचार रखते हुए बीमाकर्ता के शिकायत अधिकारी के पास शिकायत करें।
बीमा लोकपाल के पास कब जा सकता हूँ?
बीमाकर्ता को शिकायत करने के बाद, यदि वह शिकायत अस्वीकार करे या नियमों में अनुमत अवधि में समाधान न करे, 2017 के नियमों की समय-सीमा और मूल्य-सीमा के भीतर।
क्या जानकारी न देने पर दावा अस्वीकार हो सकता है?
बीमाकर्ता महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने पर अस्वीकार कर सकता है, पर जीवन पॉलिसियों के लिए बीमा अधिनियम की धारा 45 पॉलिसी की तिथि से तीन वर्ष बाद इसे सीमित करती है।
संबंधित सेवाएँ
चिकित्सा लापरवाही
डॉक्टरों और अस्पतालों के विरुद्ध उपभोक्ता आयोगों या दीवानी अदालतों में दावे, और संबंधित शिकायतें।
मोटर दुर्घटना दावे
सड़क दुर्घटना में मृत्यु या चोट के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में प्रतिकर के दावे।
उपभोक्ता विवाद
दोषपूर्ण वस्तुओं, सेवाओं में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की शिकायतें उपभोक्ता आयोगों में।