आपराधिक एवं साइबर कानून
FIR रद्दकरण
ऐसी FIR या आपराधिक कार्यवाही को रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका, जिससे अपराध न बनता हो या जो प्रक्रिया का दुरुपयोग हो।
DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ
कानून क्या कहता है
उच्च न्यायालय BNSS की धारा 528 (पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482) की अंतर्निहित शक्तियों और संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत FIR, आरोप पत्र या आपराधिक कार्यवाही रद्द कर सकता है। उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल (1992) में मुख्य स्थितियाँ बताई हैं: जब आरोप, जैसे के तैसे मान लेने पर भी, अपराध नहीं बनाते; जब वे स्वाभाविक रूप से असंभव हों; जब कार्यवाही पर विधिक रोक हो; या जब कार्यवाही स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण हो। इस चरण पर अदालत सामान्यतः विवादित साक्ष्य नहीं तौलती। अपराध के अनुसार, पक्षों के बीच वास्तविक समझौते पर भी कुछ मामले रद्द हो सकते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
FIR किन आधारों पर रद्द हो सकती है?
मुख्यतः जब आरोप, जैसे हैं वैसे स्वीकार करने पर भी, अपराध प्रकट नहीं करते; जब वे इतने असंभव हों कि कोई समझदार व्यक्ति उन्हें स्वीकार न करे; जब कोई कानून कार्यवाही पर रोक लगाता हो; या जब कार्यवाही स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण हो। ये भजन लाल मामले में मान्य श्रेणियाँ हैं।
क्या मुझे साबित करना होगा कि शिकायत झूठी है?
नहीं। उच्च न्यायालय यह देखता है कि FIR और अभिलेख की सामग्री, जैसी है वैसी पढ़ने पर, अपराध प्रकट करती है या नहीं। इस चरण पर वह सामान्यतः छोटा विचारण नहीं करता और विवादित तथ्य तय नहीं करता।
क्या समझौते के बाद मामला रद्द हो सकता है?
मुख्यतः निजी प्रकृति के कई अपराधों में, जैसे कुछ वैवाहिक और वाणिज्यिक विवाद, उच्च न्यायालय वास्तविक समझौते पर कार्यवाही रद्द कर सकता है। समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध सामान्यतः इस आधार पर रद्द नहीं किए जाते।
क्या याचिका लंबित रहते पुलिस जाँच जारी रख सकती है?
हाँ, जब तक उच्च न्यायालय अंतरिम आदेश से जाँच पर रोक न लगाए या याचिकाकर्ता को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा न दे।
इस सेवा को संभालने वाले वकील
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