व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं क्षति
भरण-पोषण एवं निर्वाह-व्यय
पति/पत्नी, बच्चों या माता-पिता द्वारा भरण-पोषण के दावे, और उनका प्रवर्तन।
DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ
कानून क्या कहता है
भरण-पोषण कई कानूनों के अंतर्गत माँगा जा सकता है: स्वयं का भरण-पोषण न कर सकने वाली पत्नी, बच्चों और माता-पिता के लिए BNSS की धारा 144 (पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125); अंतरिम भरण-पोषण और स्थायी निर्वाह-व्यय के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 और 25; हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956; और घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005। अदालत दोनों पक्षों की आय और संपत्ति, उनकी उचित आवश्यकताएँ, जीवन स्तर और आश्रितों को देखती है। उच्चतम न्यायालय के रजनेश बनाम नेहा (2020) मार्गदर्शन के अनुसार दोनों पक्षों को सामान्यतः संपत्ति और देनदारियों का शपथ पत्र देना होता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भरण-पोषण कौन माँग सकता है?
जिस कानून के अंतर्गत दावा किया जाए उसके अनुसार, पत्नी (जिसमें पुनर्विवाह न करने वाली तलाकशुदा पत्नी शामिल है), नाबालिग बच्चे, विकलांगता के कारण स्वयं का भरण-पोषण न कर सकने वाले वयस्क बच्चे, और स्वयं का भरण-पोषण न कर सकने वाले माता-पिता।
राशि कैसे तय होती है?
कोई निश्चित सूत्र नहीं है। अदालत (दाखिल शपथ पत्रों से) दोनों पक्षों की आय और संपत्ति, उचित आवश्यकताएँ, विवाह के दौरान का जीवन स्तर और अन्य दायित्व देखती है।
क्या राशि बाद में बदली जा सकती है?
हाँ। परिस्थितियाँ बदलने पर, जैसे आय में परिवर्तन, कोई भी पक्ष राशि बदलने का आवेदन दे सकता है।
भरण-पोषण न दिया जाए तो क्या?
आदेश पारित करने वाली अदालत में वसूली का आवेदन दिया जा सकता है। BNSS की धारा 144 के अंतर्गत अदालत राशि वसूलने का वारंट जारी कर सकती है और धारा में दिए अनुसार भुगतान न करने पर कारावास का आदेश दे सकती है।
इस सेवा को संभालने वाले वकील
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