आपराधिक एवं साइबर कानून
विचारण में बचाव
बचाव की तैयारी और संचालन: अभियोजन के साक्ष्य की परख और अभियुक्त का पक्ष प्रस्तुत करना।
DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ
कानून क्या कहता है
आपराधिक बचाव यह परखता है कि अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे साबित किया है या नहीं। इसमें आरोप पत्र और दस्तावेज़ों की जाँच, सामग्री से अपराध न बनने पर उन्मोचन की माँग, अभियोजन गवाहों की प्रतिपरीक्षा, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अंतर्गत साक्ष्य पर विधिक आपत्तियाँ, और उपयोगी होने पर बचाव साक्ष्य प्रस्तुत करना शामिल है। भारत में आपराधिक मामलों का निर्णय न्यायाधीश करते हैं, जूरी नहीं। कोई अधिवक्ता परिणाम का वादा नहीं कर सकता; परिणाम साक्ष्य और अदालत पर निर्भर करता है।
परामर्श
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बचाव की तैयारी में क्या शामिल है?
दिए गए आरोप पत्र और दस्तावेज़ पढ़ना, कमियाँ और विरोधाभास पहचानना, उन्मोचन माँगना है या नहीं यह तय करना, प्रतिपरीक्षा की तैयारी करना और बचाव के गवाह या दस्तावेज़ पहचानना।
क्या अभियुक्त को गवाही देनी ही होती है?
नहीं। अभियुक्त को अपने विरुद्ध गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता (अनुच्छेद 20(3))। वह अपने बचाव में शपथ पर गवाही देना चुन सकता है, जो अपने अधिवक्ता के साथ लेने वाला निर्णय है।
उन्मोचन क्या है?
आरोप तय होने से पहले, यदि सामग्री आगे बढ़ने के पर्याप्त आधार नहीं देती, तो अदालत अभियुक्त को उन्मोचित कर सकती है। इससे मामला उसी चरण पर समाप्त होता है, जो उच्च अदालत के पुनरीक्षण के अधीन है।
दोषमुक्ति होने पर क्या होता है?
अभियुक्त आरोप से मुक्त हो जाता है। राज्य या शिकायतकर्ता अनुमत समय में अपील कर सकते हैं, और अपील तय होने या समय बीत जाने पर दोषमुक्ति अंतिम हो जाती है।
इस सेवा को संभालने वाले वकील
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आपराधिक विचारण – जिला न्यायालय
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