डेमोक्रेट लीगल एंड पार्टनर्स
सभी सेवाएँ

रोज़गार, सार्वजनिक एवं विशेष

परमादेश याचिकाएँ

किसी लोक प्राधिकारी को ऐसा विधिक कर्तव्य निभाने का निर्देश देने वाली रिट, जिसे उसने नहीं निभाया या निभाने से इनकार किया।

DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ

कानून क्या कहता है

परमादेश की रिट किसी लोक प्राधिकारी को कानून द्वारा डाला गया लोक कर्तव्य निभाने का निर्देश देती है। याचिकाकर्ता को दिखाना होता है कि उसे उस कर्तव्य के पालन का विधिक अधिकार है, कि वह कर्तव्य कानून में मौजूद है, और प्रायः यह कि माँग की गई थी जिसे अस्वीकार किया गया या जिस पर कार्रवाई नहीं हुई। परमादेश केवल संविदात्मक दायित्व लागू कराने के लिए, या जहाँ कानून विवेक देता है वहाँ प्राधिकारी को किसी विशेष तरीके से निर्णय करने का निर्देश देने के लिए जारी नहीं होता; हाँ, यह प्राधिकारी को कानून के अनुसार निर्णय करने का निर्देश दे सकता है।

परामर्श

चैम्बर से बात करें।

अपना नाम, नंबर और मामले के बारे में एक पंक्ति छोड़ें। चैम्बर का कोई सदस्य कार्य समय में आपको कॉल या संदेश करेगा।

गोपनीय रखी जाती है। केवल आपसे संपर्क के लिए उपयोग होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुझे क्या दिखाना होगा?

कि प्राधिकारी का विधिक कर्तव्य है, कि आपको उसके पालन का अधिकार है, और कि आपने लिखित रूप में माँग की थी जिसे अस्वीकार किया गया या जिस पर कार्रवाई नहीं हुई।

आम उदाहरण क्या हैं?

लंबित आवेदन या अभ्यावेदन पर निर्णय करने, शर्तें पूरी होने पर कानून द्वारा अपेक्षित प्रमाणपत्र या लाइसेंस जारी करने, या निर्धारित देय राशि जारी करने के निर्देश।

क्या पहले प्राधिकारी को लिखना चाहिए?

हाँ, सामान्यतः। लिखित अभ्यावेदन और उसकी प्राप्ति का प्रमाण यह दिखाने में मदद करते हैं कि माँग की गई थी और उस पर कार्रवाई नहीं हुई।

यदि प्राधिकारी आदेश का पालन न करे तो?

याचिकाकर्ता अनुपालन न होने को उच्च न्यायालय के संज्ञान में ला सकता है, जिसमें न्यायालय अवमान अधिनियम, 1971 के अंतर्गत अवमानना आवेदन शामिल है।

इस सेवा को संभालने वाले वकील

Piyush Singh

मैनेजिंग पार्टनर

अवध बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

प्रोफ़ाइल देखें

Istekhaf

सहयोगी अधिवक्ता

अवध बार

भाषाएँ: अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू

प्रोफ़ाइल देखें