आपराधिक एवं साइबर कानून
सौदा अभिवचन (प्ली बार्गेनिंग)
पात्र अपराधों के लिए BNSS के अध्याय XXIII के अंतर्गत, अदालत की स्वीकृति से, वैधानिक प्रक्रिया।
DLP का चैम्बर: नं. 548, ए ब्लॉक, हाई कोर्ट, लखनऊ
कानून क्या कहता है
भारत में सौदा अभिवचन BNSS के अध्याय XXIII (पहले दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय XXIA) में दी गई प्रक्रिया है। यह केवल उन अपराधों के लिए उपलब्ध है जिनमें सात वर्ष तक के कारावास का दंड है, और देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को प्रभावित करने वाले अपराधों या किसी महिला अथवा निर्दिष्ट आयु से कम के बच्चे के विरुद्ध अपराधों के लिए नहीं। अभियुक्त यह बताते हुए आवेदन देता है कि यह स्वैच्छिक है; अदालत अभियुक्त से एकांत में पूछताछ करती है, और अभियोजन तथा पीड़ित के साथ परस्पर संतोषजनक निपटारा तय किया जा सकता है। फिर अदालत कानून द्वारा तय सीमाओं में सज़ा सुनाती है। दोष स्वीकार करने से दोषसिद्धि होती है, इसलिए यह सलाह लेकर किया जाने वाला गंभीर निर्णय है।
परामर्श
चैम्बर से बात करें।
अपना नाम, नंबर और मामले के बारे में एक पंक्ति छोड़ें। चैम्बर का कोई सदस्य कार्य समय में आपको कॉल या संदेश करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कौन से मामले पात्र हैं?
सात वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराध, सिवाय देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को प्रभावित करने वाले अपराधों और किसी महिला अथवा निर्दिष्ट आयु से कम के बच्चे के विरुद्ध अपराधों के। उसी अपराध में पहले दोषसिद्ध व्यक्ति भी बाहर है।
सज़ा कैसे तय होती है?
अदालत उन सीमाओं में सज़ा देती है जिन्हें कानून अपराध के दंड से जोड़ता है, और जहाँ परिवीक्षा का कानून लागू हो, अभियुक्त को परिवीक्षा पर भी छोड़ सकती है। पीड़ित को प्रतिकर दिलाया जा सकता है।
क्या निर्णय के विरुद्ध अपील हो सकती है?
सौदा अभिवचन के निर्णय के विरुद्ध अपील नहीं होती, सिवाय उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका या उच्च न्यायालय में रिट याचिका के।
क्या इससे दोषसिद्धि होती है?
हाँ। निपटारा अपराध के लिए दोषसिद्धि है, इसलिए इसे बचाव की मज़बूती और रोज़गार, यात्रा आदि पर इसके प्रभाव के साथ तौलना चाहिए।